
ऐतिहासिक श्रीकृष्ण मंदिर में चल रही
श्रीमद्भागवत कथा के चौथा दिन पर कथा व्यास बाल योगी पंचौरी जी महाराज ने भक्तों को आत्मज्ञान, भक्ति और जीवन मूल्यों का दिव्य संदेश दिया। कथा स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और शाम तक मंदिर प्रांगण भक्ति भाव से गूंजता रहा। महाराज जी ने कहा कि मनुष्य तीन कारणों से पतन को प्राप्त होता है- चरित्रहीनता, अतिथि सेवा का अभाव और गो सेवा की उपेक्षा। उन्होंने ध्रुव चरित्र का उदाहरण देते हुए बताया कि पुण्यवान मातृभावना से जन्म लेने वाली संतान ही ध्रुव समान महान होती है। परिवार व वंश का पुण्य मिलकर ही संतान का उद्धार करता है। ऋश्वभ देव अवतार की महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि ज्ञानी परमहंसों का आचरण ही समाज को सही दिशा देता है। आत्मज्ञान की उपमा देते हुए उन्होंने नारियल के भीतर पानी और गोले के संबंध का उदाहरण दिया – जैसे दोनों अलग होते हुए भी जुड़े रहते हैं, वैसे ही आत्मा और शरीर का संबंध है। जब तक मनुष्य विषय वासनाओं में बंधा रहता है, तब तक
भागवत कथा में उमड़ा जन सैलाब, श्रीकृष्ण के भजनों से भक्तिमय हुआ माहौल
भागवत कथा, जिसे श्रीमद्भागवत पुराण भी कहते हैं, हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसका मुख्य उद्देश्य भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों, विशेषकर भगवान कृष्ण की लीलाओं का वर्णन करना और भक्ति के महत्व को समझाना है। यह भक्ति, ज्ञान, और वैराग्य के माध्यम से मोक्ष प्राप्ति का मार्ग दिखाती है। इस कथा का श्रवण और पठन करने से मन को शांति मिलती है और आध्यात्मिक उन्नति होती है।






